यादव वाटी गौशाला । करौली की प्राचीन गौशाला

करौली की ठेकरा ग्राम में स्थित यादव वाटी गौशाला

करौली कि एक विख्यात गौशाला है ठेकरा स्थित यादव वाटी गौशाला वहा
यह गौशाला करौली की प्राचीनतम गौशालाओं में से एक है , जिसे करौली के महाराजा भोम पाल जी ने अपने पौत्र महाराज कुमार सुरेन्द्र पाल जी के जन्म के उपलक्ष्य में 6 नवम्बर 1931 को दि गयी 1200 एकड़ भूमि दान की थी । इस गौशाला में आज 2000 के आस पास गायों को संरक्षण दिया जाता है ।
साथ ही इस गौशाला के सदस्य मुन्ना सिंह जी , शिवनाथ सिंह जी और बाकी के सदस्य भी सराहना के पात्र है , जोकि इस सेवा कार्य को पूरी आत्मीयता से करते है ।
हमारी करौली शुरू से ही गौसेवक रही है , प्राचीन काल से ही हम यदुवंशी राजपूतों के लिए गौसेवा अनिवार्य रही है ।
श्री कृष्ण के वंशजों की मुख्य राजधानी रही करौली के द्वारा रियासत काल में भी करौली की कई गौशालाओं को संरक्षण प्रदान किया जाता था
एवम् आज भी यादव वाटी गौशाला को करौली राज परिवार की तरफ से प्रत्येक वर्ष 5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है एवम् में करौली की जानता का भी धन्यवाद करता हूं क्यूंकि भी गौसेवा में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है ।
आज हमारे देश में यह एक बड़ी चुनौती के रूप में भी है कि हमारे धर्म की पहचान हमारी गौमाता आज सड़कों पर भूखी घूमती है , और प्लास्टिक आदि खा कर मृत्यु को प्राप्त होती है , जोकि चिंताजनक है , गाय सिर्फ धर्म के नजरिए से ही नहीं वरन व्यापार और वैद्यक-संबंधी भी सर्वश्रेष्ठ है । गाय के दूध से लेकर गौमूत्र तक सभी अवयवों में हमारे लिए बहुत सी आवश्क चीज होती है ।
जिसके लिए हमें इनका संरक्षण करना चाहिए ।
पर हमारे लिए यह गौरव की बात है कि आज भी हम करौली वासी अपनी संस्कृति की पहचान को बनाए हुए है , और आज भी करौली शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक लोग गौसेवा में बढ़ चढ़ कर योगदान देते है ।
अतः आप सभी से आशा है कि आप सभी आगे भी गौसेवा के कार्य को इसी प्रकार आगे बढ़ाएंगे ।

:- विवस्वत पाल करौली ।