• Karaulians welcome you

    करौली राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। जोकि जयपुर से 195 किमी दूरी पर दिल्ली मुम्बई रेल मार्ग पर पड़ने वाले हिन्डौनसिटी से 30 किमी दक्षिण में एवं धौलपुर से 105 किमी पश्चिम में और गंगापुरसिटी से 40 किमी पूर्व में चम्बल की घाटी और अरावली पर्वत श्रंखलाओ की गोद में खादड़ों के बीच भद्रावती नदी के किनारे स्थित है इसकी स्थापना 1348 ई. के आसपास यदुवंशी राजा अर्जुन देव ने की थी जिनके बारे में कहा जाता है कि वे भगवान कृष्ण के वंशज थे। सन् 1818 में करौली राजपूताना एजेंसी का हिस्सा बना और सन् 1947 में भारत की आजादी के बाद यहां के शासक महाराज गणेश पाल देव बहादुर ने भारत का हिस्सा बनने का निश्चय किया। इसके बाद 13 मार्च 1948 को अलवर।भरतपुर । धौलपुर और करौली रियासतो को मिला कर एक संघ बनाया गया जिसे मत्स्य संघ का नाम दिया गया इसके बाद 7 अप्रैल 1949 में मत्स्य संघ का राजस्थान संघ में विलय हुआ और करौली राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले का हिस्सा बना। करौली जिले का गठन 19 जुलाई 1997 को 32वें जिले के रूप में हुआ था इस जिले को प्रशासनिक दृष्टि से 6 तहसील, 5 पंचायत समिति और 3 नागरपालिकाओ में विभक्त किया था जो इस प्रकार है तहसील :- करौली। हिंडौन। मंडरायल। सपोटरा। नादौती और टोडाभीम....और..


  • राज्य का नाम - करौली
    स्थिति :- पूर्वी राजस्थान
    शासक का पद :- महाराजा देव बहादुर
    जाति व वंश ः -जादौन राजपूत चन्द्रवंशी (यदुवंशी)
    तोप की सलमी ः- 17 तोप
    कौम का अभिवादन ः- जय श्री कृष्ण
    क्षेत्रफल ः- 1870 वर्गमील
    आमदनी ः- 4,83,810 रुपये
    फौज की संख्या ः- पैदल :-3200
    घुडसवार:- 400
    तोप :- 40
    राज्य में स्थित गांव :- 861
    सबसे अधिक समय तक राज्य करने वाले शासक :- महाराजा भंवर पाल जी (41 वर्ष)
    सबसे कम समय तक राज्य करने वाले शासक :- महाराजा गणेश पाल जी (6 माह)
    ब्रिटिश सरकार से सम्बन्ध :- 15-11-1871 को मित्र राज्य की संधि हुई
    मतस्य संघ का गठन :- 17 मार्च 1948
    राजस्थान राज्य मे विलय :- 7 मार्च 1949
    करौली जिले का गठन :- 19 जुलाई 1997

  • मेंहदीपुर बालाजी

    25 Dec 2018

    likes 68

    श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल (भैरव)। यह तीन देव यहाँ आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे। इनके प्रकट होने से लेकरअब तक बारह महंत इस स्थान पर सेवा-पूजा कर चुके हैं और अब तक इस स्थान के दो महंत इस समय भी विद्यमान हैं। सर्व श्री गणेशपुरी जी महाराज (भूतपूर्व सेवक) श्री किशोरपुरी जी महाराज (वर्तमान सेवक)। यहाँ के उत्थान का युग श्री गणेशपुरी जी महाराज के समय से प्रारम्भ हुआ और...

  • कैला माता का इतिहास

    26 Dec 2018

    likes 63

    माँ राजराजेश्वरी कैला देवी जी का पावन धाम ( मंदिर ) कालीसिल नदी के किनारे त्रिकूट पर्वत पर स्थित है | चैत्र माह में कृष्णपख की द्वादशी से शुक्ल पख की द्वादशी तक कैला मॉं का मेला भरता है |रियासत काल में प्रत्येक मास की शुक्लपख में राजा अवश्य मॉं के दर्शन ...और...