करौली के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री शिवचरण सिंह धाभाई जी का निधन l

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याद आएंगे बाबूजी ...हंसमुख मिलनसार और जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति l सर्वसाधारण के लिए की सेवा के लिए हमेशा तैयार l

याद आएंगे बाबूजी ...

जिला मुख्यालय के निकट गुडला के टीकतपुरा के  मूल  निवासी अंगदराम धाभाई के पुत्र शिवचरण सिंहजी आज अपनी अंतिम यात्रा पर प्रस्थान कर गए l उनकी पहचान सर्वविदित थी  l

जीवन के कई वर्ष वो करौली के हटरिया मोहल्ले में अपनी हवेली में रहे l सभी के लिए हमेशा सुलभ l जमीन से जुड़े व्यक्ति जिनको अहंकार छू तक नहीं सका l एक मशहूर राजनेता और मंत्री होने के बाबजूद वो एक सरल जीवन जीते थे l 

जब करौली के राजनैतिक नेताओं की चर्चा होती थी तो सबसे पहले शिवचरण धाभाई का नाम लिया जाता है  l उनका जन्म 13 मई 1926 को हुआ l करौली के महाराजा हाई स्कूल से मैट्रिक करने के बाद 1949 ई0 में इंटर की पढ़ाई पूरी करके देश सेवा का जजवा लेकर सुरक्षा बल में सेवा शुरू की l कुछ दिनों के बाद ही करौली की राजनीति ने इन्हें त्याग पत्र देने पर मजबूर कर दिया l करौली राजपरिवार से इनका काफी निकट संबंध था । यह करौली महाराजा श्री गणेश पाल जी के धाय भाई थे ।

बाद में शिवचरण सिंह राजनीति में सितारे बनकर उभरे तथा 1967 ई0 में चतुर्थ विधान सभा के लिए कांग्रेस के टिकट पर महवा से विधायक बने l मंत्री मण्डल फेरबदल के समय 5 सितंबर ,1967 को सुखाडिया मंत्रीमंडल में इन्हें उप मंत्री बनाया गया l छटी विधानसभा चुनावों में ये बयाना से निर्दलीय विधायक बने l 1979 में सप्तम विधान सभा में इन्होने भाजपा विधायक के रूप में करौली से विजय हांसिल करके 20 दिसंबर 1979 को भेंरों सिंह मंत्रिमंडल में केविनेट मंत्री की शपथ ग्रहण की l भाजपा द्वारा 1992 में इन्हें राज्य सभा में भेजा गया l इस शानदार राजनैतिक सफलता के आधार पर लोग इन्हे राजनीति का कुशल खिलाड़ी मानते थे  l

अपने राजनैतिक कार्यकाल के दौरान इन्होने विदेश यात्रा भी कीं l राज्य सभा सदस्य रहते हुए इन्हें अनेक कमेटियों में रखा गया l इस अवधि में  सम्पूर्ण भारत भ्रमण का भी इन्हें अबसर मिला l इतिहास, भूगोल एवम पर्याबरण इनके प्रिय विषय थे  l ये स्वास्थ्य और रक्षा के लिए पूरी तौर से सजग थे  l जनसमस्याओं के समाधान के लिए इनके अनुभव प्रभावी थे l 94 वर्ष की आयु में भी  इनका समय प्रबंधन अनुकरणीय था  lप्रातः काल जल्दी उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृति ,भ्रमण ,समाचार पत्रों का पठन ,नाश्ता ,स्नान ,भोजन ,आराम ,फलाहार ,बगीचे की देखभाल , सब्जी मंडी जाकर ख़ुद सब्जी खरीदना , जनचर्चा ,सायंकालीन भोजन ,टेलीविज़न पर समाचार दर्शन और अंत में जल्दी शयन इनका नियमित कार्यक्रम था  l उनका निधन एक युग का अंत है ।

करौली को बाबूजी की याद हमेशा आएगी। 

श्री मदन मोहन जी महाराज बाबूजी की आत्मा को शांति प्रदान करें ।

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